Tuesday, August 27, 2013

जिंदा हूँ और याद बाकी है

झरोंके आज भी उन गलियों को ताकते हैं,
आँखें आज भी नम हो जातीँ हैं
लव्ज़ों को रोकना फिर भी आसान है
ख्वाहिशें आज भी बेपर्दा हो जाती हैं

दिल का हसना और रोना इक जुनूं का हिस्सा सा है
कभी ज़िद थी ये धडकनों की
राहों के पथरीले फूलों ने जब टोका
बैरी हो गए वो इस मन के

आज भी ये गिला नहीं की इश्क था
आज भी ये सुकून है की जूनून था
आज भी खुद पे गर्व है के
हम सही थे जब जमाने को गुरुर था  

दर्द है अगर तो इस बात का
की सच को बचाने में सच ही छिप गया
सच्चाई न छोडने की कसम में
अपनों ने ही झूठा करार दे दिया

ये आँखों की नमी कीमती है
धुल में मिलना इसका नसीब न बनने दे
दर्द ने भी कुछ तो सिखाया है
इस पल के अँधेरे में उसको न गुम होने दे